बिलाईगढ़-ग्राम पंचायत नगरदा में प्रशासनिक लापरवाही और पंचायत प्रतिनिधियों की मनमानी का एक ताजा मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत नगरदा के तालाब पार स्थित सरकारी शौचालय को तोड़कर और वहाँ मौजूद दो हरे-भरे फलदार पेड़ों को काटकर कॉमन सर्विस सेंटर (CSC सेंटर) का निर्माण कार्य शुरू किया गया है। इस मामले को लेकर ग्राम के ही निवासी शेषनारायण साहू पिता जीतराम साहू ने जिला कलेक्टर सारंगढ़-बिलाईगढ़ को एक लिखित शिकायत सौंपी है, जिसमें उन्होंने इस निर्माण कार्य को अवैध बताया है और तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

शेषनारायण साहू का कहना है कि ग्राम पंचायत के सरपंच अर्जुन लाल साहू द्वारा यह कार्य कराया जा रहा है। तालाब पार स्थित यह स्थल पहले से ही सार्वजनिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि यहाँ एक सरकारी शौचालय बना हुआ था, जिसका उपयोग ग्रामवासी तथा मुक्तिधाम आने-जाने वाले लोग करते थे। ग्राम पंचायत द्वारा अचानक उस शौचालय को तोड़कर नए निर्माण कार्य की शुरुआत की गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, उक्त स्थान पर दो फलदार पेड़ भी थे, जिनमें से एक आम और एक जामुन का पेड़ था। ये पेड़ कई वर्षों से वहाँ की हरियाली और पर्यावरण का हिस्सा थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना किसी वन विभाग की अनुमति या ग्राम सभा की सहमति के इन पेड़ों की कटाई की गई है, जो पर्यावरण संरक्षण कानूनों का उल्लंघन है।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में लिखा है कि यह कार्य न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाला है बल्कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और पंचायत अधिनियम के प्रावधानों का भी खुला उल्लंघन है। सरकारी निधि से निर्मित सार्वजनिक शौचालय को इस प्रकार तोड़कर निजी स्वार्थ या व्यक्तिगत सुविधा के लिए निर्माण कार्य करना, लोकहित के विरुद्ध है।

तालाब पार स्थित यह शौचालय विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी था जो अंतिम संस्कार या अन्य धार्मिक कार्यों के दौरान मुक्तिधाम में आते थे। कई बार बाहर से आने वाले लोगों को यहाँ सुविधा मिलती थी। लेकिन अब उसके ध्वस्त होने से लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस घटना पर नाराजगी जताई है और पंचायत प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं।

शेषनारायण साहू ने अपनी शिकायत में जिला प्रशासन से मांग की है कि-
1. संबंधित स्थल का निरीक्षण करवाया जाए।
2. शौचालय तोड़ने और पेड़ों की कटाई की जांच की जाए।
3. बिना अनुमति किए गए निर्माण कार्य को तत्काल रोका जाए।
4. दोषी सरपंच एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
5. नष्ट किए गए शौचालय को पुनः निर्मित कराया जाए ताकि ग्रामीणों को सुविधा मिल सके।
इस शिकायत के साथ उन्होंने स्थल के फोटोग्राफ भी संलग्न किए हैं, जिनमें स्पष्ट रूप से शौचालय के मलबे और कटे हुए पेड़ों के अवशेष दिखाई दे रहे हैं।इस मामले में कुछ ग्रामीणों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों के नाम पर कई बार नियमों की अनदेखी की जाती है। कई बार ग्राम सभा की बैठक किए बिना निर्णय ले लिए जाते हैं और पंचायत निधि का उपयोग मनमाने ढंग से किया जाता है। अगर इस पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो ग्राम स्तर पर भ्रष्टाचार और बढ़ेगा।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जब सरकार एक ओर हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के लिए “हरित छत्तीसगढ़” जैसी योजनाएं चला रही है, वहीं ग्राम स्तर पर अधिकारी और जनप्रतिनिधि पेड़ों की कटाई कर विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन इस घटना को गंभीरता से लेकर उदाहरण प्रस्तुत करे, ताकि भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि इस प्रकार के कार्य न करें।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि अगर वास्तव में सीएससी सेंटर की आवश्यकता है तो पंचायत को इसके लिए किसी उपयुक्त स्थान का चयन करना चाहिए था जहाँ पहले से कोई संरचना या पेड़ न हो।
शेषनारायण साहू ने कहा कि उम्मीद करते हैं कि प्रशासन इस बार निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करेगा। साथ ही, वे चाहते हैं कि ग्राम की हरियाली, पर्यावरण और सार्वजनिक सुविधाओं की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ।
यदि यह मामला सही पाया गया, तो यह ग्राम पंचायत प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी साबित हो सकता है कि विकास कार्यों के नाम पर सरकारी संपत्ति और पर्यावरण से खिलवाड़ किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं होगा।
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