ग्राम पंचायत चुरेला में विकास कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप,ग्रामीण ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी को दी शिकायत…

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बिलाईगढ़-बिलाईगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चुरेला में विकास कार्यों में भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्राम के निवासी हरिशंकर साहू ने जनपद पंचायत बिलाईगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को एक लिखित शिकायत प्रस्तुत कर सरपंच और सचिव पर फर्जी बिल लगाकर शासन की राशि गबन करने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत में सी.सी. रोड निर्माण, मोटर पंप खरीदी, स्ट्रीट लाइट रिपेयरिंग व खरीदी, और विद्यालय मरम्मत जैसे कार्यों में भारी गड़बड़ियां की गई हैं।

ग्रामवासी ने सौंपी लिखित शिकायत…

आवेदक हरिशंकर साहू पिता स्व. लक्ष्मण प्रसाद साहू, निवासी ग्राम चुरेला ने अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव ने सरकारी योजनाओं की राशि का दुरुपयोग करते हुए फर्जी बिल लगाकर भुगतान प्राप्त किया है। उन्होंने इन कार्यों की विस्तृत सूची और राशि का उल्लेख करते हुए जांच की मांग की है।

हरिशंकर साहू ने कहा कि ग्राम पंचायत में विकास कार्यों का नाम मात्र दिखाया गया है। ज़मीनी स्तर पर काम या तो अधूरा है या बिल्कुल नहीं किया गया। इसके बावजूद शासन की राशि आहरित कर ली गई है। यह सीधे-सीधे भ्रष्टाचार का मामला है और इसकी जांच होनी चाहिए।

1. सी.सी. रोड निर्माण में अनियमितता…
शिकायत पत्र में सबसे पहले सी.सी. रोड निर्माण कार्य में गड़बड़ी की बात कही गई है। यह कार्य डी.एम.एफ. (District Mineral Foundation) फंड से लगभग 10 लाख रुपये की लागत से किया गया बताया गया है।
आवेदक का आरोप है कि सड़क निर्माण में सीमेंट की मात्रा कम और गिट्टी (इंस्ट) की मात्रा अधिक रखी गई, जिससे सड़क की मजबूती पर असर पड़ा है। मोटाई मानक से कम है, और कार्य की गुणवत्ता पर किसी भी प्रकार की निगरानी नहीं रखी गई। हरिशंकर साहू ने बताया कि सड़क कुछ ही महीनों में टूटने लगी है और कई जगहों पर दरारें दिखाई दे रही हैं। इससे स्पष्ट होता है कि निर्माण कार्य में मानक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

2. प्राथमिक शाला मरम्मत में फर्जी भुगतान…
शिकायत के अनुसार, ग्राम की प्राथमिक शाला मरम्मत के लिए 31,532/- की राशि जारी की गई थी, लेकिन स्थल पर कोई कार्य नहीं किया गया। आवेदक का कहना है कि स्कूल की हालत पहले जैसी ही है,दीवारों में दरारें हैं, छत से सीलन टपक रही है और फर्श उखड़ चुका है। बावजूद इसके रिकॉर्ड में मरम्मत कार्य पूर्ण दिखाकर पूरी राशि निकाल ली गई है। यह गंभीर वित्तीय अनियमितता है जो विभागीय जांच की मांग करती है।

3. स्ट्रीट लाइट रिपेयरिंग और खरीदी में फर्जी बिल…

आवेदन में तीसरे बिंदु के तहत स्ट्रीट लाइट रिपेयरिंग के लिए 31,462/- और स्ट्रीट लाइट खरीदी के लिए 28,589/- की राशि आहरित किए जाने का उल्लेख है। आवेदक का कहना है कि गांव में कोई नई स्ट्रीट लाइट नहीं लगाई गई और जो पुरानी लाइटें हैं, वे भी बंद पड़ी हैं। लेकिन रिकॉर्ड में पूरा कार्य दर्शाया गया है और राशि निकाल ली गई है।

गांव के अन्य ग्रामीणों का भी कहना है कि शाम होते ही गांव के अधिकांश रास्ते अंधेरे में डूबे रहते हैं। न नई लाइटें लगीं और न पुरानी रिपेयर की गईं। यह पूरा कार्य केवल कागजों पर पूरा बताया गया है।

4. मोटर पंप खरीदी में तीन बार गड़बड़ी…

सबसे गंभीर आरोप मोटर पंप खरीदी को लेकर है। शिकायत में कहा गया है कि तीन अलग-अलग बार मोटर पंप खरीदी के नाम पर क्रमशः 37,240/-, 30,480/- और 24,380/- की राशि आहरित की गई।

लेकिन गांव में कोई नई मोटर पंप स्थापित नहीं की गई। आवेदक का कहना है कि स्थल पर कोई मोटर पंप दिखाई नहीं देता, जबकि रिकॉर्ड में तीन बार खरीदी दर्ज की गई है। यह सरासर फर्जीवाड़ा है और सरकारी धन की हेराफेरी का मामला है।

सरपंच-सचिव पर गंभीर आरोप…

हरिशंकर साहू ने अपने आवेदन में कहा है कि ग्राम पंचायत चुरेला के सरपंच और सचिव ने मिलकर शासन की योजनाओं की राशि का दुरुपयोग किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी बिल लगाकर राशि आहरित की गई, जबकि ग्राम में कोई वास्तविक कार्य नहीं किया गया। यह न केवल भ्रष्टाचार है बल्कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की भावना के साथ विश्वासघात है।

उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी सरपंच एवं सचिव के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

जांच की मांग और प्रशासन की भूमिका…

आवेदक ने अपने पत्र में मुख्य कार्यपालन अधिकारी से अनुरोध किया है कि वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित करें। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक सरपंच और सचिव को उनके पदों से हटाया जाए ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें।

भ्रष्टाचार पर लगाम की जरूरत…

चुरेला ग्राम पंचायत का यह मामला केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। बिलाईगढ़ क्षेत्र की कई पंचायतों में इसी तरह के आरोप सामने आ चुके हैं, जहाँ फर्जी बिलों के माध्यम से राशि आहरित की जाती है जबकि स्थल पर कार्य नहीं होता। यह शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने भी प्रशासन से मांग की है कि ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि ईमानदार अधिकारी और कर्मचारी बिना दबाव के कार्य कर सकें और गांवों में वास्तविक विकास हो सके।

ग्राम पंचायत चुरेला का मामला इस बात का प्रमाण है कि जब निगरानी कमजोर होती है, तो योजनाओं की राशि का दुरुपयोग आसान हो जाता है। हरिशंकर साहू जैसे जागरूक नागरिकों की पहल से ऐसे भ्रष्टाचार उजागर होते हैं। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों पर कैसी कार्रवाई करता है। यदि जांच निष्पक्ष हुई, तो यह मामला अन्य पंचायतों के लिए भी एक नजीर बन सकता है।

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