सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के विकासखण्ड बिलाईगढ़ के ग्राम पंचायत बेल्हा के आश्रित ग्राम माहुलडीह में जल जीवन मिशन के अंतर्गत बनाई गई पानी टंकी की गुणवत्ता पर अब सवाल उठने लगे हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनाए जा रहे इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत निर्मित यह टंकी मात्र छः माह के भीतर ही लिकेज होने लगी है। इससे न केवल ग्रामीणों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली और ठेकेदार की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
गांव में हाहाकार, पानी की बूंद-बूंद को तरसे ग्रामीण…
माहुलडीह गांव में जल जीवन मिशन की शुरुआत ग्रामीणों के लिए बड़ी उम्मीद के साथ हुई थी। ग्रामीणों का मानना था कि अब उन्हें शुद्ध पेयजल की सुविधा मिलेगी और उन्हें दूर-दराज से पानी लाने की परेशानी नहीं होगी। लेकिन यह उम्मीद कुछ ही महीनों में निराशा में बदल गई। ग्रामीणों ने बताया कि टंकी के निर्माण के कुछ ही माह बाद उसमें दरारें पड़ने लगीं और अब टंकी से लगातार पानी लिकेज हो रहा है।
गांव के निवासी रामेश्वर पटेल बताते हैं,पानी टंकी बनने के समय ही हमने ठेकेदार से कहा था कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन हमारी बात किसी ने नहीं सुनी। अब देखिए, टंकी से पानी टपक रहा है और गांव के कई घरों तक पानी पहुंच ही नहीं रहा।
वहीं सुनिता बाई नामक एक ग्रामीण महिला ने बताया कि हम रोज़ सुबह पानी भरने के लिए इंतज़ार करते हैं, लेकिन सप्लाई बहुत कम दबाव में आती है। ऊपर से टंकी में लिकेज होने के कारण बहुत सारा पानी बेकार जा रहा है।
लाखों रुपये की लागत, पर गुणवत्ता शून्य…
जानकारी के अनुसार, जल जीवन मिशन के अंतर्गत माहुलडीह में बनी इस पानी टंकी पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण के लिए संबंधित विभागों के अधिकारी जिम्मेदार थे, लेकिन कार्य के दौरान न तो पर्याप्त निगरानी की गई और न ही कार्य की गुणवत्ता की जाँच पर ध्यान दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा निम्नस्तरीय सीमेंट और लोहे का उपयोग किया गया, जिससे टंकी की मजबूती प्रभावित हुई और कुछ ही महीनों में यह लीक होने लगी।
ग्राम पंचायत के सदस्यों ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा है कि अगर समय रहते प्रशासन ने जांच नहीं कराई, तो आने वाले दिनों में यह टंकी पूरी तरह से अनुपयोगी हो सकती है।
शासन-प्रशासन की चुप्पी पर सवाल…
ग्रामीणों ने इस समस्या की जानकारी कई बार पंचायत सचिव और जल विभाग के अधिकारियों को दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। न तो ठेकेदार को नोटिस जारी हुआ है और न ही मरम्मत कार्य शुरू हुआ है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय समाजसेवी धनेश्वर साहू ने कहा, जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना है। लेकिन जब निर्माण कार्य ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाए, तो योजना का उद्देश्य ही विफल हो जाता है। प्रशासन को तुरंत जांच कर दोषी ठेकेदार पर कार्रवाई करनी चाहिए।
ग्रामीणों ने की जांच की मांग…
ग्रामीणों ने मांग की है कि शासन इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए और दोषी ठेकेदार व संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। साथ ही, खराब टंकी की मरम्मत कर जल्द से जल्द पानी सप्लाई बहाल की जाए।
गांव के सरपंच प्रतिनिधि ने भी कहा कि हमने विभाग को इस विषय में लिखित सूचना दी है। अगर अगले कुछ दिनों में कार्रवाई नहीं होती है, तो हम सामूहिक रूप से जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे।
क्या कहता है जल जीवन मिशन?…
जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति करना है। इस योजना के तहत गुणवत्ता पूर्ण निर्माण और नियमित निगरानी की सख्त व्यवस्था है। लेकिन माहुलडीह का मामला यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर योजना के क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि कई बार ठेकेदारों द्वारा जल्दबाज़ी में काम पूरा करने के चक्कर में गुणवत्ता से समझौता किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप ऐसे निर्माण लंबे समय तक टिक नहीं पाते।
ग्रामीणों की उम्मीद शासन से…
माहुलडीह के ग्रामीण अब शासन और प्रशासन की ओर उम्मीद लगाए बैठे हैं। उन्हें उम्मीद है कि जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी और जल जीवन मिशन की मंशा के अनुरूप गांव में फिर से स्वच्छ पानी की सुविधा बहाल की जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ माहुलडीह का मामला नहीं, बल्कि कई अन्य गांवों में भी इसी तरह के घटिया निर्माण कार्य किए गए हैं। यदि शासन सख्ती से जांच करे, तो कई और अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं।
माहुलडीह की पानी टंकी का लिकेज केवल एक तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि यह एक प्रशासनिक और नैतिक विफलता का प्रतीक है। जल जीवन मिशन जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि कार्य की गुणवत्ता कितनी पारदर्शिता और जिम्मेदारी से की जाती है। यदि शासन ने समय रहते संज्ञान नहीं लिया, तो ऐसी योजनाएं केवल कागज़ों तक सीमित रह जाएंगी और ग्रामीणों की प्यास यूं ही अधूरी रह जाएगी।
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