सोहागपुर ग्राम पंचायत में फर्जी बिल के माध्यम से 2.95 लाख के गबन का मामला उजागर:-सचिव पर गंभीर आरोप…

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बिलाईगढ़-जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ की ग्राम पंचायत सोहागपुर में भ्रष्टाचार का एक और बड़ा मामला सामने आया है। गांव के ही कुछ पंचों ने ग्राम पंचायत के सचिव श्री कुबेर सिंह सिदार पर फर्जी बिल के माध्यम से 2,95,000 (दो लाख पंचानवे हजार रुपये) की सरकारी राशि गबन करने का गंभीर आरोप लगाया है। यह राशि कथित रूप से “जिओ टैग सुधारने” के नाम पर ओटीपी के माध्यम से आहरित की गई थी, जिसके बारे में ग्रामसभा को कोई जानकारी नहीं दी गई।
यह मामला केवल एक वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि स्थानीय स्वशासन प्रणाली पर गहरे संकट का संकेत भी देता है।

घटना का खुलासा कैसे हुआ?…

सोहागपुर ग्राम पंचायत के कुछ जागरूक पंचों जिनमें दुधनाथ साहू, प्रमिला, सावित्री, केशव, दुर्गा साहू और देवनारायण पटेल जैसे नाम शामिल हैं,ने जिला कलेक्टर को एक लिखित शिकायत दी है। शिकायत में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया है कि सचिव श्री कुबेर सिंह सिदार ने बिना ग्रामसभा की अनुमति और जानकारी के, जिओ टैगिंग के नाम पर फर्जी बिल प्रस्तुत कर 2.95 लाख रुपये निकाल लिए।
पंचों का कहना है कि न तो कोई कार्य धरातल पर हुआ है, और न ही इस राशि के उपयोग के संबंध में किसी भी ग्रामसभा में कोई प्रस्ताव या रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है।

क्या है ‘जिओ टैग सुधारने’ का मामला?…

ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले निर्माण और विकास कार्यों की निगरानी के लिए भारत सरकार द्वारा जिओ टैगिंग का प्रावधान रखा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी भी निर्माण कार्य की सही लोकेशन, प्रगति और गुणवत्ता की डिजिटल निगरानी की जा सके।

परंतु, इस प्रक्रिया का लाभ उठाकर कई स्थानों पर फर्जी जिओ टैगिंग रिपोर्ट और बिल प्रस्तुत कर राशि निकासी के मामले सामने आए हैं। सोहागपुर में भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है जहाँ सचिव ने ओटीपी सत्यापन की प्रक्रिया का लाभ उठाकर धन राशि आहरित की।

शिकायतकर्ताओं की मांगें…

शिकायत में यह स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि:-

1. सचिव कुबेर सिंह सिदार के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाए।
2.गबन की गई राशि की वसूली की जाए।
3. ग्राम पंचायत के पूर्व निर्माण कार्यों की भी जांच करवाई जाए, क्योंकि उनमें भी गड़बड़ी की आशंका है।
4. ग्रामसभा की पुनर्गठन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु विशेष निरीक्षण टीम गठित की जाए।

क्या कहते हैं ग्रामीण और पंचायत सदस्य?…
स्थानीय पंच दुधनाथ साहू का कहना है:गांव की जनता को आज तक इस राशि के बारे में कोई जानकारी नहीं है। जब हमने सचिव से सवाल किया तो गोलमोल जवाब मिला।”
“पिछले साल कई निर्माण कार्य के लिए राशि निकाली गई थी, पर आज तक एक भी कार्य पूरा नहीं हुआ।”

वहीं पंच प्रमिला ने कहा:-

हमने कई बार ग्रामसभा बुलाने का प्रयास किया, लेकिन सचिव और सरपंच दोनों ही टालते रहे। अब पानी सर के ऊपर हो गया है, इसलिए शिकायत करना पड़ा।”

पूर्व में भी लगे थे आरोप…

सूत्रों के अनुसार, श्री कुबेर सिंह सिदार पर पूर्व में भी ग्राम पंचायत के निर्माण कार्यों को लेकर आरोप लगे थे। पंचायत की निधि से सड़क निर्माण, नाली निर्माण और सोलर लाइट जैसी योजनाओं के लिए फंड स्वीकृत हुआ था, लेकिन उनमें से कई कार्य या तो अधूरे रह गए या पूरी तरह से शुरू ही नहीं हुए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सचिव द्वारा बार-बार कार्यों को दिखाकर राशि निकाली जाती है, लेकिन धरातल पर कोई स्थायी काम नहीं दिखाई देता।

प्रशासन की भूमिका और प्रतिक्रिया…

अब प्रश्न उठता है कि स्थानीय प्रशासन की निगरानी प्रणाली इतनी कमजोर कैसे रह गई कि सचिव द्वारा बार-बार ऐसी गतिविधियां बिना पकड़े अंजाम दी जाती रहीं।जिला कलेक्टर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ को इस मामले की लिखित शिकायत सौंप दी गई है। अभी तक इस विषय में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों की मानें तो प्रशासन ने प्राथमिक जांच के आदेश दे दिए हैं।
संभावना है कि जल्द ही पंचायत की लेखा परीक्षा (Audit) करवाई जाएगी और सचिव को निलंबित कर जांच के दायरे में लाया जाएगा।

क्या कहता है पंचायत कानून?…

छत्तीसगढ़ पंचायत अधिनियम 1993 के अनुसार:कोई भी खर्च ग्रामसभा की अनुमति और प्रस्ताव के बिना नहीं किया जा सकता।
सचिव का कर्तव्य होता है कि वह सभी खर्चों की रिपोर्ट ग्रामसभा में प्रस्तुत करे।
फर्जी बिल या जाली दस्तावेज़ के आधार पर सरकारी धन आहरित करना दंडनीय अपराध है, जिसमें वित्तीय जुर्माने के साथ-साथ जेल तक की सजा का प्रावधान है।

इस पूरे मामले को देखकर यह स्पष्ट है कि:-

1. सचिव के खिलाफ विभागीय जांच का आदेश होगा।
2. राशि की वसूली और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
3. यदि मामले की गंभीरता पाई गई, तो यह राज्य सतर्कता आयोग (Vigilance) तक भी जा सकता है।
4. पंचायत में नए सचिव की नियुक्ति की मांग उठ सकती है।
सोहागपुर ग्राम पंचायत में सामने आया यह मामला केवल एक व्यक्ति के भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि पूरे स्थानीय स्वशासन तंत्र की कमजोरी का परिचायक है। यह मामला प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों और आम ग्रामीणों तीनों के लिए चेतावनी है कि पारदर्शिता, जवाबदेही और भागीदारी के सिद्धांतों के बिना कोई भी व्यवस्था टिकाऊ नहीं हो सकती।

अब यह देखना शेष है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ प्रभावी और पारदर्शी कार्यवाही करता है, या यह मामला भी अन्य कई मामलों की तरह धूल फांकता रह जाएगा।

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