बिलाईगढ़-ग्राम पंचायत सोनियाडीह, जनपद पंचायत बिलाईगढ़ में 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
आवेदक बनवारीलाल केंवट,दिलबाई और नरेश पटेल (पंच) ने संयुक्त रूप से जिला कलेक्टर सारंगढ़-बिलाईगढ़ को एक लिखित शिकायत सौंपी है, जिसमें पंचायत स्तर पर की गई कई वित्तीय गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है।
शिकायत का सारांश…
शिकायतकर्ताओं ने अपने आवेदन में बताया है कि ग्राम पंचायत सोनियाडीह में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए कई कार्यों में पारदर्शिता नहीं रही है और खर्च की गई राशि की वास्तविक स्थिति संदिग्ध है।आवेदन के अनुसार, पंचायत द्वारा निम्नलिखित कार्यों में लाखों रुपए खर्च किए गए, लेकिन ग्रामवासियों को इन कार्यों की गुणवत्ता, मात्रा और आवश्यकता पर संदेह है।
1/ 49,250 रुपये की राशि से मिट्टी, मुरुम, रेती और सीमेंट की खरीदी व भुगतान किया गया, जिसकी वास्तविक उपयोगिता स्पष्ट नहीं है।
2/ 49,000 की राशि से टेबल-कुर्सी की खरीदी की गई,ग्रामीणों का कहना है कि यह खरीद जरूरत से ज्यादा और संभवतः बाजार दर से ऊँचे मूल्य पर की गई।
3/ 48,530 में अलमारी, दरी, कूलर और डेस्कटॉप टेबल की खरीदी बताई गई है, जबकि ग्राम पंचायत कार्यालय में पहले से ही ऐसे सामान मौजूद थे।
4./ 48,550 में अलमारी, दरी, कूलर, पंखा और डेस्कटॉप टेबल की खरीदी दोहराई गई है, जिससे दोहरी बिलिंग (duplicate expenditure) का संदेह पैदा होता है।
5/ 89,799 रुपये और 89,334 रुपये की राशि से दो अलग-अलग मदों में “पचरी निर्माण” (कंक्रीट पथ निर्माण) का कार्य दिखाया गया है, जिसकी जमीनी स्थिति की जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन सभी कार्यों के लिए अपलोड किए गए बिल “ई-ग्राम स्वराज पोर्टल” पर उपलब्ध हैं, जिनकी प्रतियां शिकायत के साथ संलग्न की गई हैं।
ग्रामीणों की आपत्ति…
ग्राम पंचायत सोनियाडीह के ग्रामीणों का आरोप है कि ये सभी कार्य या तो अधूरे हैं या फिर इनका कोई वास्तविक स्वरूप नहीं है। कई ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत भवन में नए सामान आने की कोई जानकारी नहीं दी गई, न ही ग्रामसभा में इन खरीदों पर चर्चा की गई।
बनवारीलाल केंवट ने बताया…
हमने पंचायत भवन में जाकर देखा, वहां कोई नई टेबल-कुर्सी या कूलर नहीं दिखा। जब हमने सचिव से पूछा तो उन्होंने कहा कि सब खरीद हो चुकी है और बिल अपलोड कर दिए गए हैं। लेकिन सामान नजर नहीं आया।”
इसी तरह पंच नरेश पटेल ने कहा…
पंचायत में पचरी निर्माण के नाम पर दो बार लगभग 1.8 लाख रुपये खर्च दिखाए गए हैं, लेकिन गांव में ऐसा कोई नया पथ नहीं बना। यदि बनाया गया होता, तो ग्रामीणों को जरूर जानकारी होती।”
15वें वित्त आयोग की राशि का उद्देश्य…
दरअसल, 15वें वित्त आयोग की राशि का उद्देश्य ग्राम पंचायतों में मूलभूत सुविधाएँ विकसित करना, जैसे स्वच्छता, जल संरक्षण, नाली निर्माण, पंचायत भवन का रखरखाव आदि है।
राज्य शासन के निर्देशों के अनुसार, इस राशि का उपयोग पारदर्शिता और ग्रामसभा की स्वीकृति के बाद ही किया जा सकता है।
ग्राम पंचायत को प्रत्येक व्यय का विवरण “ई-ग्राम स्वराज पोर्टल” पर अपलोड करना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य जनता के बीच पारदर्शिता बनाए रखना है।
हालाँकि, सोनियाडीह के ग्रामीणों का आरोप है कि अपलोड तो कर दिया गया, लेकिन वास्तविक कार्य नहीं हुए जिससे यह सवाल उठता है कि राशि कहाँ खर्च की गई।
शिकायतकर्ताओं की मांग…
शिकायत में स्पष्ट रूप से माँग की गई है कि:प्रत्येक मद के अंतर्गत व्यय की गई राशि की स्थलीय जांच (spot inspection) कराई जाए।
खरीदे गए सामानों की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट तैयार की जाए।
यदि गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित ग्राम पंचायत सचिव, सरपंच और जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों पर उचित कार्रवाई की जाए।शिकायतकर्ताओं ने यह भी कहा है कि वे जांच में पूर्ण सहयोग देंगे और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को तैयार हैं।
पारदर्शिता पर सवाल…
इस घटना ने पंचायत स्तर पर वित्तीय पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।लोगों का मानना है कि “ई-ग्राम स्वराज” जैसी डिजिटल प्रणाली तभी प्रभावी होगी जब ग्रामसभा की भूमिका सक्रिय और जनता जागरूक रहे।
जनता की अपेक्षा…
ग्राम पंचायत सोनियाडीह के ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा।
गांव के लोगों का कहना है कि यदि जांच में गड़बड़ी सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में पंचायत स्तर पर इस तरह की गड़बड़ियाँ दोबारा न हों।
संलग्न दस्तावेज़ों का महत्व…
शिकायत के साथ “ई-ग्राम स्वराज” पर अपलोड किए गए बिलों की छाया प्रति (photocopy) भी संलग्न की गई है।
ये दस्तावेज़ जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं क्योंकि इनमें भुगतान की राशि, तारीख, और वस्तुओं के विवरण दर्ज हैं।यदि इन बिलों में दर्ज वस्तुएँ जमीनी स्तर पर नहीं मिलतीं, तो यह फर्जी व्यय (Fake Expenditure) का स्पष्ट प्रमाण हो सकता है।
ग्राम पंचायत सोनियाडीह का यह मामला स्थानीय शासन व्यवस्था में जवाबदेही और निगरानी की कमी को उजागर करता है।छोटे-छोटे गाँवों में लाखों रुपये की योजनाएँ आती हैं, लेकिन यदि उनका उपयोग पारदर्शिता से न हो, तो ग्रामीण विकास केवल कागज़ों तक सीमित रह जाता है।
इसलिए ज़रूरी है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर जांच करे और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई व वसूली की प्रक्रिया शुरू करे।
अब नज़रें जिला प्रशासन पर हैं…
क्या सारंगढ़-बिलाईगढ़ के कलेक्टर कार्यालय ग्राम पंचायत सोनियाडीह की इस शिकायत पर सख्त रुख अपनाएगा या मामला फाइलों में दब जाएगा? ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार जनता की आवाज़ सुनी जाएगी और सच्चाई सामने आएगी।

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