ग्राम पंचायत नगरदा में 15वें वित्त की राशि में घोर अनियमितता का आरोप…

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सरपंच पर भाई को 1.69 लाख रुपये भुगतान का भी आरोप, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग…

बिलाईगढ़-जनपद पंचायत बिलाईगढ़ के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत नगरदा में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं। ग्राम के निवासी शेषनारायण साहू ने जिला कलेक्टर सारंगढ़-बिलाईगढ़ को आवेदन देकर पंचायत के सरपंच और सचिव पर भ्रष्टाचार और नियम उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए हैं। आवेदन में छह बिंदुओं पर विस्तृत शिकायत की गई है और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

शिकायत में छह गंभीर बिंदु, लाखों की राशि पर सवाल…

ग्राम पंचायत नगरदा में वर्ष 2024-25 के दौरान 15वें वित्त आयोग की राशि से कई कार्य कराए गए हैं, जिनमें पारदर्शिता का अभाव बताया गया है।

पैरा ढोलाई में 45,000 रुपयेका खर्च-पंचायत द्वारा 45,000 रुपये पैरा ढोलाई के नाम पर खर्च दिखाए गए हैं।

शिकायतकर्ता के अनुसार, यह कार्य कागजों में हुआ है, जबकि स्थल पर कोई स्पष्ट कार्य दिखाई नहीं देता।

टेबल खरीदी में 36,000 रुपये का भुगतान-ग्राम पंचायत ने 36,000 रुपये की राशि टेबल खरीदी के नाम पर खर्च की है। परंतु ग्राम पंचायत भवन में ऐसी टेबलें मौजूद नहीं हैं। इससे खरीदी प्रक्रिया पर प्रश्न उठे हैं।

राबीश पटाई में 90,000 रुपये की अनियमितता-पंचायत ने 90,000 रुपये राबीश पटाई कार्य के लिए खर्च दिखाए हैं, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार कार्य अधूरा है या किया ही नहीं गया।

स्ट्रीट लाइट कार्य में 1,38,100 रुपये का व्यय-स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर 1,38,100 रुपये खर्च किए गए हैं। परंतु ग्राम में सीमित संख्या में ही लाइटें लगी हैं, कई स्थानों पर पोल खाली खड़े हैं।

पंचायत राज अधिनियम की धारा 40(ग) का उल्लंघन-शिकायत में कहा गया है कि सरपंच और सचिव ने कार्यों के भुगतान के समय छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40(ग) का पालन नहीं किया, जो एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है।

सरपंच के भाई को 1.69 लाख रुपये का भुगतान-सबसे बड़ा आरोप यह है कि सरपंच अर्जुन लाल साहू ने अपने सगे भाई भीम लाल साहू (अक्षय ट्रेडर्स) को 1,69,000 रूपये का भुगतान पंचायत खाते से करवाया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह सीधा हित-संघर्ष है और पंचायत नियमों का खुला उल्लंघन।

ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से साक्ष्य संलग्न-शेषनारायण साहू ने अपने आवेदन के साथ “ई-ग्राम स्वराज पोर्टल” में अपलोड किए गए सात बिलों की प्रतियां और अक्षय ट्रेडर्स को किए गए भुगतान के दस्तावेज भी संलग्न किए हैं। उनका कहना है कि इन दस्तावेजों की जांच कराने से गड़बड़ी साफ-साफ साबित हो जाएगी।

जांच की मांग और संभावित कार्रवाई…

शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से अनुरोध किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र टीम गठित की जाए, जिसमें जनपद पंचायत बिलाईगढ़ के अधिकारी, लेखा सहायक और तकनीकी अमला शामिल हों।यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरपंच और सचिव के खिलाफ धन के दुरुपयोग, पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।

पंचायत राज अधिनियम के अनुसार, किसी जनप्रतिनिधि द्वारा सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की पुष्टि होने पर उसे धारा 40 के तहत पद से निलंबित या पदच्युत किया जा सकता है।

प्रशासनिक सूत्रों ने दी जानकारी…

जिला प्रशासन के सूत्रों ने बताया कि आवेदन प्राप्त होने के बाद मामले की प्राथमिक जांच के लिए जनपद सीईओ को निर्देशित किया जा सकता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। हालांकि, खबर लिखे जाने तक कलेक्टर कार्यालय से कोई आधिकारिक बयान प्राप्त नहीं हुआ है।

पारदर्शिता पर सवाल, पंचायत व्यवस्था में जवाबदेही की मांग…

पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं की निगरानी में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।पंचायतों में अक्सर 15वें वित्त की राशि का उपयोग बिना ग्राम सभा की स्वीकृति के कर दिया जाता है। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। हर खर्च का ब्यौरा ग्राम सभा में सार्वजनिक होना चाहिए।

ग्राम पंचायत में पारदर्शिता की परीक्षा…

नगरदा ग्राम पंचायत का यह मामला अब प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है। यदि जांच में गड़बड़ियां सामने आती हैं, तो यह न केवल स्थानीय प्रशासन पर प्रश्नचिह्न लगाएगा बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं की साख पर भी असर डालेगा।ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन मामले की गंभीरता को समझते हुए निष्पक्ष जांच करेगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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